कुंवर की उम्मीद, शान्विका की चाल |
संविका का पत्र और संविका का याद |
ठुकरा के मेरा प्यार सीज़न 2, के एपिसोड 2 में ,
कुलदीप एक कमरे में खड़ा होकर संविका के दिए हुए पत्र को पढ़ रहा था |तभी उसकी पत्नी आ जाती है और उस पत्र को देख लेती है ! और कहती है कि क्या अभी तक आप संविका को याद कर रहे हैं| तभी कुलदीप चौहान बोलता है कि है।
मुझे उसके बारे में कोई बात नहीं करना है ।
तभी उसकी पत्नी बोलती है, लेकिन मुझे यबात करना है उसके बारे में |
अब कुलदीप गुस्सा होकर अपने कमरे में चला जाता है और अंदर से दरवाजा बंद कर लेता है |
अब सब घर वाले परेशान हो जाते हैं तभी
कुलदीप की पत्नी अपने पापा दद्दू को कॉल करती है और कहती है कि, कुलदीप अंदर से दरवाजा बंद कर लेले बाडन यह बात सुनकर दद्दू बोलता है | ठीक बा हम अभी आवतानी|
दद्दू और कुलदीप के बीच बात |
जब दद्दू आता है तो उसके बहुत मनाने पर कुलदीप दरवाजा खोल देता है। उसके बाद अब जैसे ही दद्दू संविका का नाम लेता है तभी कुलदीप कहता है कि , आप चुप रही ओकर नाम मत लीं हम संविका के बर्बाद कर डेम अब | ।
अब अचानक दद्दू बोलता है कि अरे दामाद जी आप ओकर टेंसन मत लीं ऊ सब हमारा उपर छोड़ दीं । तभी कुलदीप कहता है, कि वो मेरी दुश्मन है- तो दद्दू बोलता है| मैं भी तो इस घर का हूँ |
यानि आपके दुश्मन हमर दुसमन | उ संविका हमार भी दुसमन हिया |
तब कुलदीप बोलता है ठीक है लेकिन ओकरा के मारे के नइखे ।
ओकासा के तड़पाए के ब हमारा । दद्दू बोलता है ठीक बा कुलदीप बाबु |
दद्दू के खिलाफ कुलदीप का चाल |
अब दद्दू के घर जाने के बाद कुलदीप और उसके पापा बहुत खुश थे |क्योंकि दद्दू का प्लान कुलदीप को पहले ही पता चला गया था| कि वो संविका को मारने वाला है |तभी कुलदीप नाटक करता है| ताकि वो दद्दू के दिल की बात जन सके । और कुलदीप को सच में पता चल जाता है की दद्दू उसे मरने वाला है |
अब कुलदीप बोलता है कि पापा मेरे रहते हुए संविका को कुछ नहीं हो सकता ।
दद्दू का नया चाल संविका पर |
अब दद्दू घर आने के बाद अपने नौकर से बोलता है कि ओ संविका के हम ना मारेंम चौहान खानदान के ही सबसे बड़ा दुश्मन मारी !
गौरी यादव के भाई |
गौरी यादव को पुष्कर चौहान ने मारा था इसलिए उसका भाई अब चौहान खाना दान से बदला लेना चाहता था।
गौरी का भाई जेल में था। अब दद्दू ने अधिकारी से बात करके गौरी यादव के भाई को जेल से आजाद कराया ताकि वो संविका को और पुष्कर को जन से मार सके|
संविका पर हमला और पुलिस का आगमन |
अब इधर रात होते हीं संविका और हमला हो जाता है ।
संविका अपना बंदूक निकालकर चलने लगती है और कई गुंडों को मर देती है बाकी भाग जाते हैं |
सुबह होते ही पुलिश आती है, तो संविका कहती है कि हमें कोई FIR नहीं लिखवाना है |
संविका के घर कुवर साहब का आगमन |
तभी वहां कुंवर साहब पहुच जाते हैं ।
और कहते हैं इ गहर बड़ा खंडन के ह| यहाँ पुलि के कोई जरूरत नईखे। ।
पुलिस अधिअकरी वापस चला जाता है |
अब कुंवर साहब, संविका चौहान से एक लड़के के तरफ इशारा करते हुए कहते हैं कि ये मेरा कमांडर है |
इसे आपके सुरक्षा के लिए आपके पास छोड़ देता हूँ ! ये आपकी परछाई के तरह रहेगा |
आपको गोली लगने से पहले ,गोली को इसे लगना होगा तभी संविका कहती है धन्यवाद ।
अब कुंवर साहब चले जाते हैं क्योंकि उन्हें किसी खास कम से लखनऊ जाना होता है |
संविका पर हमके का राज |
जब कुवर साहब लखनऊ जा रहे होता हैं तभी उनका ड्राइवर पूछता हैं, कि कुंवर साहब आप संविका के काहे इतना सपोर्ट करतानी तभी कुंवर अपना कहानी बताता है और कहता है|
हमके ओकर बाप शर्मिंद किया था।
कही इहे सैलाब मत बन जाओ | एही से हम एके काबू में कर ले तनी।
तभी कुंवर बोलता है कि जो हमला संविका और हुआ था वह हमला मैने ही कराया था ताकि मैं संविका को बचा कर उसका दिल जीत सकूं ।
संविका के घर वाले और संविका |
इधर संविका अपने सास से कहती है, कि हमें पता है कुंवर पर यकीन नहीं करना चाहिए और ऊ धोखा बाज है लेकिन कुंवर के ताकत का उपयोग करके हम अपना दुसमन से लड़ सकेनी |
